स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)-2.0 भारत सरकार द्वारा उठाया गया एक अहम कदम

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)

स्वच्छ भारत मिशन (SBM) या स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में खुले में शौच को समाप्त करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया एक देशव्यापी अभियान है। मिशन का चरण 1 अक्टूबर वर्ष 2019 तक चला। चरण 2 को वर्ष 2020-21 और वर्ष 2024-25 के बीच लागू किया जाएगा।

भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया, इस मिशन (Swachh Bharat Abhiyan) का उद्देश्य महात्मा गांधी के जन्म की 150वीं वर्षगांठ 2 अक्टूबर वर्ष 2019 तक “खुले में शौच मुक्त” भारत को प्राप्त करना है। मिशन के पहले चरण का उद्देश्य स्थानीय स्तर मैनुअल सफाई, जागरूकता पैदा करने और स्वच्छता प्रथाओं के उन्मूलन शामिल किए गए।

मिशन के दूसरे चरण का उद्देश्य खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना और ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन में सुधार करना है। मिशन 6.2 के लक्ष्य की ओर बढ़ने के उद्देश्य से है (2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित सतत विकास लक्ष्य संख्या 6)।

अभियान का आधिकारिक नाम हिंदी में है । अंग्रेजी में, यह “Swachh Bharat Mission” में अनुवाद करता है। इस अभियान को आधिकारिक रूप से 2 अक्टूबर वर्ष 2014 को राजघाट, नई दिल्ली में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। यह भारत का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है, जिसमें भारत के सभी भागों के तीन मिलियन सरकारी कर्मचारियों और छात्रों के साथ 4,043 शहरों, कस्बों और ग्रामीण समुदायों के लोग भाग लेते हैं।

चंपारण में एक रैली में, प्रधान मंत्री ने गांधी के चंपारण सत्याग्रह के संदर्भ में अभियान सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह का आह्वान किया, जो 10 अप्रैल वर्ष 1916 को शुरू हुआ।

मिशन को दो भागों में विभाजित किया गया था:- ग्रामीण और शहरी। ग्रामीण क्षेत्रों में “SBM (Swachh Bharat Mission)- ग्रामीण” को पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के माध्यम से वित्तपोषित और मॉनिटर किया गया था; जबकि “SBM (Swachh Bharat Mission)- शहरी” आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा देखा गया था।

अभियान के हिस्से के रूप में, स्वयंसेवकों, जिन्हें स्वच्छाग्रहियों के रूप में जाना जाता है, या “स्वच्छता के राजदूत”, ने ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता के लिए इनडोर पाइपलाइन और सामुदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। अन्य गतिविधियों में राष्ट्रीय वास्तविक समय की निगरानी और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) जैसे कि द अग्ली इंडियन (The Ugly Indian), वेस्ट वारियर्स (Waste Warriors) और स्वैच पुणे (Solid Waste Collection and Handling) आदि शामिल थे।

सरकार ने वर्ष 2014 से 2019 के बीच लगभग 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान की, हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से भारतीय उनका उपयोग नहीं करते हैं।

लोगों को शौचालय का उपयोग करने के लिए मजबूर करने के लिए जबरदस्ती दृष्टिकोण का उपयोग करने के लिए अभियान की आलोचना की गई थी। कई परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से बिजली या खाद्य पात्रता तक पहुंच से लाभ के नुकसान की धमकी दी गई थी।

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) संक्षिप्त विवरण

राष्ट्र                   भारत

प्रारंभ                2 अक्तूबर वर्ष 2014; 5 वर्ष पूर्व

प्रधानमंत्री        श्री नरेंद्र मोदी

उद्घोष             एक कदम स्वच्छता की ओर

वेबसाईट           swachhbharat.mygov.in

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) का शुभारंभ

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan), महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर वर्ष 2014 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य 2 अक्टूबर 2019 तक महात्मा गांधी के जन्म की 150वीं वर्षगांठ पर खुले में शौच को मिटाना था, ग्रामीण भारत में 9 करोड़ शौचालयों का निर्माण 1.96 लाख करोड़ के अनुमानित लागत पर बनाने का लक्ष्य रखा गया।

राष्ट्रीय अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) ने 4,441 वैधानिक शहरों और कस्बों तक फैलाया गया। मार्च 2014 में यूनिसेफ (UNISEF) इंडिया और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा बड़े स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित एक स्वच्छता सम्मेलन में कल्पना की गई थी।

Swachh Bharat Abhiyan का वित्तीय खर्च

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) से ₹620 अरब से अधिक की लागत आने का अनुमान है। ) प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए शौचालय निर्माण के लिए सरकार द्वारा ₹12,000 प्रदान किए गए, जो नागरिकों को  एक प्रोत्साहन प्रदान करता है। भारत 2016 केंद्रीय बजट में ₹9 हजार करोड़  की राशि इस मिशन के लिए आवंटित किया गया था।

वर्ष 2016 में स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Abhiyan) के लिए भारत की सार्वभौमिक समर्थन करने के लिए विश्व बैंक ने  150 करोड़ डॉलर का  ऋण प्रदान किया। इस कार्यक्रम (Swachh Bharat Abhiyan) को विश्व बैंक से, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की पहल के हिस्से के रूप में निगमों, सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय मध्यम शिक्षा अभियान के तहत राज्य सरकारों द्वारा धन और तकनीकी सहायता भी मिली है।

Swachh Bharat Abhiyan का कार्यान्वयन

स्वच्छ भारत मिशन (SBM) मोबाइल ऐप का उपयोग लोगों और सरकारी संगठनों द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Abhiyan) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार विज्ञापनों के माध्यम से लोगों में जागरूकता ला रही है।

Swachh Bharat Abhiyan

वर्ष 2017 में, अभियान शुरू होने से पहले 2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रीय स्वच्छता कवरेज 38.7% से बढ़कर 65% हो गया। अगस्त 2019 में यह 90% था। 35 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों, 699 जिलों और 5.99 लाख गांवों को 25 सितंबर 2019 तक खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया था।

जिन शहरों और कस्बों को ODF घोषित किया गया है, वे 22 प्रतिशत और शहरी वार्डों ने 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर सॉलिड वेस्ट कलेक्शन हासिल किया है। शहरी स्थानीय निकायों में काम करने वाले स्वच्छाग्रही स्वयंसेवकों की संख्या बढ़कर 20,000 हो गई और ग्रामीण भारत में काम करने वालों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई। लड़कियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा वाले स्कूलों की संख्या 4 लाख (37%) से बढ़कर लगभग 10 लाख (91%) हो गई।

स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य

  • 2 अक्टूबर 2019 तक देश को पूर्णतः खुले में शौच से मुक्त बनाना। इसके लिए व्यक्तिगत, सामूहिक और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण का लक्ष्य रखा गया।
  • खुले में शौच की खामियों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता करना।
  • वर्ष 2014 से 2019 के 5 साल में 2 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
  • ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित रूप से अलग-अलग करने का लक्ष्य रखा गया।
  • अधिक-से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया, ताकि शुद्ध वायु के स्तर में वृद्धि हो।
  • देश में कचरा मुक्त वातावरण बनाना।
  • स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि विश्व में सुधारने का कृतसंकल्प।
  • नागरिकों में स्वच्छता संबंधी आदतों में सुधार करते हुए ऐसे जीवन जीने का नियमित लक्ष्य बनाना।
  • हाथों से मल की सफाई करने की व्यवस्था को पूर्ण रूप से हटाना।

स्वच्छ भारत अभियान नारे

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) के तहत कुछ नारे जो प्रसिद्ध हुए, वे हैं-

  1. हम सबका यही सपना, स्वच्छ भारत हो अपना।
  2. क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी, यही मेरी है ड्रीम सिटी।
  3. सफाई से खुद को स्वच्छ बनाना है स्वछता से पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाना है।
  4. क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया।
  5. न गंदगी करेंगे, न करने देंगे।
  6. एक कदम स्वच्छता की ओर। आदि

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Abhiyan) के अंग स्वरूप में च्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान 25 सितंबर, 2014 से 31 अक्टूबर 2014 के बीच केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालय संगठन में आयोजित किया गया। इस दौरान की जाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं:-

  • स्कूल कक्षाओं के दौरान प्रतिदिन बच्चों के साथ सफाई और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विशेष रूप से महात्मा गांधी की स्वच्छता और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ीं शिक्षाओं के संबंध में बात करें।
  • कक्षा, प्रयोगशाला तथा पुस्तकालयों आदि की सफाई करना।
  • स्कूल में स्थापित किसी भी मूर्ति या स्कूल की स्थापना करने वाले व्यक्ति के योगदान के बारे में बात करना और इस मूर्तियों की सफाई करना।
  • शौचालयों और पीने के पानी वाले क्षेत्रों की सफाई करना।
  • रसोई और सामान-गृह की सफाई करना।
  • खेल के मैदान की सफाई करना।
  • स्कूल बगीचों का रखरखाव और सफाई करना।
  • स्कूल भवनों का वार्षिक रखरखाव रंगाई एवं पुताई के साथ।
  • निबंध, वाद-विवाद, चित्रकला, सफाई तथा स्वच्छता पर प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • बाल मंत्रिमंडलों का निगरानी दल बनाना और सफाई अभियान की निगरानी करना।

इसके अलावा फिल्म शो, स्वच्छता पर निबंध/ चित्रकारी और अन्य प्रतियोगिताएं, नाटकों आदि के आयोजन द्वारा स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य का संदेश प्रसारित करना। मंत्रालय ने इसके अलावा स्कूल के छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को शामिल करते हुए सप्ताह में दो बार आधे घंटे सफाई अभियान शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)

निर्मल भारत अभियान या Swachh Bharat Abhiyan कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्व-सुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) का उद्देश्य पांच वर्षों में भारत को खुला शौच से मुक्त देश बनाना है। अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए 1,34,000 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रूप देते हुए जैव-उर्वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए किया जाएगा।

अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी और स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बड़े वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस प्रयास में देश भर की ग्रामीण पंचायत और पंचायत समिति को इससे जोड़ना है।

अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) के एक भाग के रूप में प्रत्येक पारिवारिक इकाई के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की इकाई लागत को ₹10,000 से बढ़ा कर ₹12,000 रुपये कर दिया गया है और इसमें हाथ धोने, शौचालय की सफाई एवं भंडारण को भी शामिल किया गया है।

इस तरह के शौचालय के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता ₹9,000 रुपये और इसमें राज्य सरकार का योगदान ₹3,000 रुपये होगा। जम्मू एवं कश्मीर एवं उत्तरपूर्व राज्यों एवं विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलने वाली सहायता ₹10,800 होगी जिसमें राज्य का योगदान ₹1,200 रुपये होगा। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त योगदान करने की स्वीकार्यता होगी।

अभियान के प्रभाव

संबंधित मंत्रालयों द्वारा बनाए गए आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 10 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू स्तर के शौचालयों का निर्माण किया गया है और शहरी क्षेत्रों में 60 लाख घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में लगभग 60 लाख सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का भी निर्माण किया गया है। फलस्वरूप, देश भर में 4,234 शहरों और 6,00,000 से अधिक गांवों ने खुद को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया है।

इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में 81.5 हजार वार्डों में अब ठोस कचरे के संग्रहण के लिए 100% डोर टू डोर (Door to Door) कलेक्शन है और लगभग 65 हजार वार्डों में 100% कचरे का पृथक्करण होता है। शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले लगभग 150 हजार मीट्रिक टन ठोस कचरे में से, 65% को संसोधित किया जा रहा है।

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (Quality Council of India) द्वारा अगस्त 2017 में जारी एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में बताया गया है कि कुल मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण “शौचालय के लिए घरेलू उपयोग” कवरेज 62.5% और शौचालय का उपयोग 91.3% तक बढ़ गया, हरियाणा में 99% परिवारों के साथ राष्ट्रीय रैंकिंग में सबसे ऊपर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन के शुभारंभ के बाद से ग्रामीण भारत में कम से कम डायरिया से होने वाली मौतों का औसत था।

वर्ष 2018 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार और वर्ष 2019 में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा प्रकाशित किया गया था कि वर्ष 2018 तक 71% ग्रामीण घरों में शौचालय का उपयोग किया गया था। हालांकि यह वर्ष 2019 में भारत सरकार के दावे के साथ 95% ग्रामीण क्षेत्रों में था। NSO की संख्या ने वर्ष 2012 में पिछली सर्वेक्षण अवधि के दौरान स्थिति में एक महत्वपूर्ण सुधार का संकेत दिया, जब केवल 40% ग्रामीण घरों में शौचालय तक पहुंच थी।

इतिहास

स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल वर्ष 1999 से शुरू हुआ था। भारत सरकार ने व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन किया और पूर्ण स्वच्छता अभियान (TSC) शुरू किया जिसको बाद में (1 अप्रैल 2012 को) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा निर्मल भारत अभियान (NBA) नाम दिया गया। स्वच्छ भारत अभियान के रूप में 24 सितंबर वर्ष 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से निर्मल भारत अभियान का पुनर्गठन किया गया था।

‘निर्मल भारत अभियान’ (1999 से 2012 तक पूर्ण स्वच्छता अभियान, या TSC) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई समुदाय की अगुवाई वाली पूर्ण स्वच्छता (CLTS) के सिद्धांतों के तहत एक कार्यक्रम था। इस स्थिति को हासिल करने वाले गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार नामक कार्यक्रम के तहत मौद्रिक पुरस्कार और उच्च प्रचार प्राप्त हुआ।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया कि मार्च 2014 में यूनिसेफ इंडिया (UNICEF-India) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने भारत सरकार द्वारा 1999 में शुरू विशाल पूर्ण स्वच्छता अभियान के हिस्से के रूप में स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन किया, जिसके बाद इस विचार (Swachh Bharat Abhiyan) को विकसित किया गया।

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